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मिथिला के बाबाधाम के रूप में प्रसिद्ध कुशेश्वरस्थान, जाने बाबा कुशेश्वरनाथ की महीमा।


कुशेश्वरस्थान का इतिहास

कुशेश्वरस्थान का इतिहास बहुत पुराना हैं, जहां इसका ज़िक्र पुराणों तक में मिलता है। साथ ही कुशेश्वर स्थान को भगवान राम के पुत्र कुश से जोड़ कर देखते हैं, वहीं लोगों की माने तो इसका निर्माण राजा कुशध्वज ने कराया थी। बाबा कुशेश्वरस्थान मंदिर की बात करें तो, कहा जाता है की हजारों साल पहले यहाँ कुश का घना जंगल था। मंदिर के पास के गाँव के खागा हज़ारी नामक चरवाहे ने देखा कि एक स्थान पर बहुत से दुधारू गाय अपनी दूध गिरा रही है। यह बात उसने लोगों को जाकर बताई, जिसके बाद लोगों भी उस जगह पर पहुँचे। गाँव के लोग ने जिस जगह पर दूध गिर रहा था, उस जगह की खुदाई की करायीं। खुदाई में एक शिव लिंग निकला और तब से वहां पर भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाने लगी। इन्हें अंकुरित महादेव भी कहा जाता है, यहाँ बाबा कुशेश्वरनाथ सबकी मनोकामना पूरी करते हैं।

पक्षी अभयारण्य के तौर पर मशहूर, रेलवे से भी जोड़ने की तैयारी

कुशेश्वरस्थान का बात करें तो यह भारत का एक प्रमुख पक्षी अभयारण्य के तौर पर जाना जाता है, जो करीब 14 हजार हेक्टेयर में फैला हुआ है। यहाँ पर स्थित चौर में कराके की ठण्ड में बड़े संख्या में दुर्लभ प्रजाति की पक्षीयां तीन माह तक प्रवास करते है। इसके अलावा हसनपुर- खगडिया- सकरी रेल लाइन से इसे जोड़ा जा रहा है, वहीं DARBHANGA और SAHARSA से जोड़ कर इसकों जंक्शन बनाने की भी योजना है। जल्द ही दरभंगा से खगडिया तक कुशेश्वरस्थान हो कर नेशनल हाइवे का भी निर्माण होना हैं, जो दोनों ज़िलों कि दूरी 50 किलोमीटर कम कर देगी।


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