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  • DARBHANGA CITY

बिहार का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट दरभंगा में।

अपडेट करने की तारीख: जन. 15



जैसा कि आप सभी जानते हैं कि दरभंगा में बिहार का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट तैयार किया गया है। जो कि इसका कार्य अंतिम चरण में हैं। दरभंगा के कादिराबाद में स्थित तालाब में फ्लोटिंग सोलर प्लांट को सात करोड़ रुपए की राशि से तैयार किया गया है। बिजली विभाग के तालाब में इस प्लांट को स्थापित करने का मतलब बिजली उत्पादन किया जाना है। संभवतः‌ जनवरी से इस सोलर प्लांट से 1.6 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। जहां बिजली विभाग के स्थानीय पावर सब स्टेशन के माध्यम से उपभोक्ताओं के घरों तक सप्लाई की जाएगी। पहले की तरह कोयला जलाकर बिजली उत्पादन का तरीका अब पुरानी बातें हो चुकी है। जहां देश भर में बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग से दुनिया बेहाल हैं, वहीं बिहार के दरभंगा में पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट तैयार किया गया है।


होगी बिजली सप्लाई





मालूम हो कि बिहार देश के पिछड़े राज्य में शामिल होने के बावजूद गैर-परंपरागत उर्जा के क्षेत्र में अपनी कदम आगे बढ़ा रहा है। दरभंगा के तालाब में नीचे मछली और ऊपर तैरता सोलर पावर प्लांट बनकर लगभग-लगभग तैयार हो चुका है। इस प्लांट की पूर्ण क्षमता 2 मेगावाट हैं, वहीं आज से 1.6 मेगावाट बिजली उत्पादन भी शुरू किया जा सकता है, जो बिजली विभाग के स्थानीय पावर सब स्टेशन के माध्यम से उपभोक्ताओं के घरों तक सप्लाई की जाएगी। फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट से हजारों घर रोशन होंगे। मालूम हो कि दरभंगा तालाबों के शहर के नाम से मशहूर हैं, वहीं अब इस तालाबों का सदुपयोग कर ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा दिया जा रहा है। दरभंगा में दो सोलर प्लांट पहले से स्थापित हैं, जिसमें एक प्लांट दरभंगा जंक्शन और दूसरा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में हैं। वहीं सरकार के निर्देशानुसार जल्द ही सभी सरकारी कार्यालयों के भवनों के छतों पर सोलर पैनल लगाया जाएगा।


जमीन की अपेक्षा पानी में कम लागत



फ्लोटिंग सोलर प्लांट के बारे में विस्तृत जानकारी देते चले कि, किसी भी जमीन पर जो सोलर प्लांट लगाया जाता है, उससे फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट काफी अलग होता है। ये भूमि-आधारित सोलर प्लांट्स के लिए एक ऐसा विकल्प होता है, जिसमें वाटर बाडीज की सतह पर फोटोवोल्टिक पैनलों की तैनाती की जाती है। इसको लेकर अक्सर सोलर प्लांट लगाने के लिए कई समस्याओं से गुजरना पड़ता है। जिसमें ग्रिड कनेक्टिविटी, भूमि अधिग्रहण, विनियम जैसी चीजें शामिल हैं। लेकिन फ्लोटिंग सोलर प्लांट इन महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं। जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित करने में ज्यादा खर्च होता है जबकि तालाबों में इसके अपेक्षाकृत कम लागत आती है।

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