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बस से बिहार आने वाले लोगों की कोरोना जांच नहीं, संक्रमण ले सकता है खतरनाक रूप।


महानगरों से बिहार आने वाले बसों के यात्री बिना किसी कोरोना टेस्ट के अपने घर पहुंच रहे हैं। इससे कोरोना का संक्रमण गांव में भी विस्तार रूप ले सकता है। बताते चलें कि गांवों का एक बड़ा तबका रोजी-रोटी कमाने के लिए शहर जाते हैं। देश में कोरोना महामारी काफी तेजी से पांव पसार रही है, जिससे कई राज्यों में कोरोना अपना घातक रूप दिखा रहा है। बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहें हैं।


जांच के डर से चोरी-छिपे निकल रहे


महाराष्ट्र, सूरत, पंजाब, असम समेत अन्य राज्यों में रहने वाले बिहार के लोगों का लौटना जारी है। इसको लेकर बिहार के एयरपोर्ट पर यात्रियों को कोरोना रिपोर्ट लाना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की टेस्टिंग को लेकर चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। हालांकि इसमें यात्रियों द्वारा भी कोताही बरता जा रहा है। घर पहुंचने की जल्दी में बिना कोरोना जांच कराएं ही जाने की जल्दी होती है। क्वारंटाइन होने और पॉजिटिव आने के डर से जांच से घबराकर चोरी-छिपे निकल जाते हैं। बता दें कि इसमें वो अपने जान के साथ तो खिलवाड़ करते ही हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज के लोगों को संक्रमण का खतरा बढ़ा देते हैं।


गांव के लोगों को जागरूक होने की जरूरत


बताते चलें कि देश में पिछले साल की तरह लॉकडाउन लगने का अंदेशा लेकर लोगों का पलायन जारी है। इसमें काफी संख्या में लोग बसों द्वारा पहुंच रहे हैं। लेकिन बस से आने वाले लोग बिना कोई जांच कराएं आ-जा रहें हैं। इससे गांवों में संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर गांव में संक्रमण का दायरा बढ़ा तो स्थिति काफी भयावह हो सकती है। इसको लेकर गांव के लोगों को भी पहल करने की जरूरत है। बाहर से आने वालों को क्वारेंटाइन करके रखें। जिससे संक्रमण का चेन फैलने से रोका जा सके।

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