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  • DARBHANGA CITY

फोरलेन कनेक्टिविटी समेत कई कार्यों पर सरकार के सुस्त रवैये के बीच दरभंगा एम्स का सपना कब होगा पूरा?



कोरोना महामारी के समय बिहार की कमजोर स्वास्थ्य ढांचे की पोल खुल कर सामने आ चुकी है। जहां बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में डीएमसीएच और बिहार के कई अन्य अस्पतालों से ख़ौफ़नाक वायरल वीडियो बाहर आ चुके हैं। कोरोना काल में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था जिस तरह चरमरा गई थी, उसके बाद से बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में हैं। इन्हीं सवालों में उत्तर बिहार के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र में दरभंगा एम्स की घोषणा और अब तक उसको लेकर हुए हवा-हवाई कार्यों को लेकर आम जनता में साफ आक्रोश देखा जा सकता है।


बिहार सरकार को करने है कई प्रारंभिक कार्य



बताते चलें की एम्स के निर्माण से पहले दरभंगा में बनने वाले एम्स तक फोरलेन कनेक्टिविटी, लो-लैंड को भर कर ऊंचा करने, ज़मीन का स्वामित्व एम्स के नाम करने जैसी प्रारंभिक शर्तों को बिहार सरकार द्वारा पूरे करने पर ही एम्स के निर्माण को शुरू करने की राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार के बीच सहमति बनी थी। इस आशय में राज्य सरकार ने 06 महीने के अंदर एम्स तक फ़ोरलेन कनेक्टिविटी सहित हर कार्यों को पूरा करके जमीन, एम्स को हैंडओवर करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन क़रीब एक साल बाद भी इन बिंदुओं को लेकर कोई भी कार्य सरकार द्वारा शुरू नहीं किया जा सका है, और ना ही ऐसे कार्यों को शुरू करने की भविष्य में संभावना दिख रही है। ऐसे में जल्द एम्स के शुरू होने की संभावना हवा-हवाई साबित हो रही है।


2015 से ही एम्स कागजों पर हैं सिमटा



मालूम हो की बिहार में पटना एम्स के बाद दूसरी एम्स जैसी संस्था के निर्माण की घोषणा 2015 में अरुण जेटली के वित्त मंत्री रहते हुए की हुई थी। क़रीब 2015 से 2020 तक केन्द्र सरकार द्वारा कई पत्राचार के बाद भी बिहार सरकार ने दूसरे एम्स के प्रस्तावित जगह का चयन नहीं किया। वही 05 सालों की लेटलतीफ़ी के बाद चुनाव से ठीक पहले आनन-फ़ानन में दरभंगा एम्स के प्रस्ताव को राज्य सरकार की ओर से केन्द्र को भेजा गया। जिसको प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की मंज़ूरी प्रदान कर दी गई। फ़िलहाल 05 साल का विलंब भी जैसे मानो काफ़ी नहीं था। नये एम्स के प्रस्ताव को केन्द्र सरकार की मंज़ूरी मिलने के बाद भी एक साल का समय यूं ही निकल चुका है। कुल मिला कर बात करें तो 06 साल की समयावधि में एम्स पर सरकार की उपलब्धि शून्य बटा सन्नाटा रही हैं। वही फिलहाल दरभंगा एम्स का सपना संजोए मिथिलांचल के लोगों को अब तक निराशा ही हाथ लग रही है।

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