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  • DARBHANGA CITY

दरभंगा में बाढ़ की तबाही के बीच बेहद भयावह तस्वीर आई सामने।


बाढ़ की विभीषिका और लोगों की बेबसी एवं लाचारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, मरने के बाद भी शव के दाह-संस्कार के लिए सूखी जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। बता दें कि दरभंगा जिला में भी लोगों को हर साल बाढ़ का दंश झेलना पड़ता है। जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड का महिसौत गांव पूरी तरह बाढ़ के पानी से डूबा हुआ है, यहां तक की सूखी जमीन नहीं बची है। ऐसे में किसी की मृत्यु हो जाने पर अंत्येष्टि कैसे की जाए बड़ी समस्या बन जाती है।


कोठी में शव की चिता रख दाह-संस्कार



महिसौत गांव में एक ग्रामीण की मृत्यु हो जाने पर गांव के लोगों ने अनूठा एवं जोखिम भरा इंतजाम किया जिससे लोग दंग रह गए हैं। बता दें कि मृतक की अंतिम विदाई को लेकर परिजनों एवं ग्रामीणों ने मिलकर श्मशान घाट पर बांस का मचान बनाया। उसके ऊपर मिट्टी की कोठी रखी। कोठी उसे कहते हैं जिसमें अनाज को रखने के लिए मिट्टी से बनाया जाता है। कोठी में शव को रखकर लकड़ी और गोबर के उपला से चित्ता सजाई गई। वहीं मृतक के बेटे ने नाव से परिक्रमा कर शव को मुखाग्नि दी।


6 महीने यह इलाका पानी में



मालूम हो कि दरभंगा जिले में कुशेश्वरस्थान एक ऐसा प्रखंड हैं, जहां हर साल बाढ़ की विभीषिका तबाही मचाती है। इतना ही नहीं बाढ़ से यह इलाका 6 महीने डूबा रहता है। जहां लोगों की जिंदगी नाव के सहारे टिकी होती है। लोगों की बेबसी और लाचारी उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती है। बाढ़ की पानी से घिरा इलाका और इस तरह शव का दाह-संस्कार किए जाने की तस्वीर काफी भयावह है।

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