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दरभंगा की बेटी ने कोरोना संक्रमण से पीड़ित पिता के शव को दी मुखाग्नि।




कोरोना का भय लोगों में इस कदर घर कर गया है कि अपने- पराए का भेद भाव तक भूल जाते हैं। जहां एक तरफ कोरोना से हुई मौत पर बेटे ने शव लेने से इंकार कर दिया, तो वहीं दूसरी तरफ एक बेटी ने कोरोना से दम तोड़ने वाले पिता को मुखाग्नि देकर समाज के सामने एक मिसाल कायम कर दी है। मालूम हो कि यह वाकया दरभंगा का हैं, जहां डीएमसीएच में भर्ती कोरोना पॉजिटिव रिटायर्ड बैंककर्मी की मौत हो गई। बता दें कि इनकी तीन बेटियों में एक बेटी भी कोरोना पॉजिटिव हैं।


बेटी ने मुखाग्नि देकर पेश की मिसाल


कोरोना से जान गंवाने वाले रिटायर्ड बैंककर्मी की अंतिम संस्कार को लेकर जिला प्रशासन और कबीर सेवा संस्थान के सदस्य जब पीपीई कीट पहनकर तैयार हो रहे थे, तो मृतक की बेटी ने अपने पिता का मुखाग्नि खुद देने की इच्छा जाहिर की। जिसके बाद बेटी ने पीपीई कीट पहनकर बहादुरी से अपने पिता को मुखाग्नि दी। आज के समय में बेटे और बेटी में कोई फर्क नहीं माना जाता है, वहीं दूसरी ओर बेटे का अपने पिता का शव लेने से इंकार करना उनकी कायरता को दिखाता है।


तीन दर्जन से अधिक शवों का अब तक अंतिम संस्कार


क्या अपना क्या पराया इस कहावत को चरितार्थ कबीर सेवा संस्थान के सदस्यगण कर रहे हैं। अब तक इन संस्थानों के द्वारा तीन दर्जनों से भी ज्यादा कोरोना में जान गंवाने लोगों के शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। ये अपने स्तर से मानवता की मिसाल कायम कर रहें हैं जो काबिले तारीफ है। वहीं दरभंगा में बेटी ने जिस तरह कोरोना संक्रमण से मृत्यु होने पर भी पिता को मुखाग्नि दिया है, उससे समाज के उन लोगों के मुंह पर तमांचा लगा है जो कोरोना से हुई मौत पर हर रिश्ते-नाते को तार-तार देते हैं। दरभंगा की बेटी ने जिस बहादुरी से संक्रमित पिता का दाह-संस्कार किया है, उनकी प्रशंसा चहुंओर की जा रही है।

1480 व्यूज1 टिप्पणी

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