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दरभंगा जंक्शन पर पार्सल ब्लास्ट की साजिश में विदेशी आतंकी का हाथ।


दरभंगा जंक्शन पर जून माह में पार्सल ब्लास्ट मामले पर बड़ी खबर सामने आ रही हैं। पार्सल ब्लास्ट मामले में आतंकियों की संलिप्तता थी। इसको लेकर NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की जांच से साफ हो गया है। वहीं इस ब्लास्ट में विदेशी आतंकी का हाथ था, इसकी पुष्टि गृह मंत्रालय ने भी कर दी है। इस खुलासे के बाद दरभंगा पार्सल ब्लास्ट चर्चा में आ गया है। ब्लास्ट के तार देश के चार शहरों में एक्टिव संदिग्ध आतंकियों से जुड़ा हुआ मिला है। इस मामले में चार आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। लेकिन इस ब्लास्ट की साजिश रचने वाले मुख्य साजिशकर्ता की खोज अभी भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है।


मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंचने की कोशिश



पकड़े गए चार संदिग्धों की निशानदेही पर इसके हेड और नेटवर्क को पूरी तरह से खंगाला जा रहा है। मालूम हो कि पार्सल ब्लास्ट को लेकर जांच एजेंसी अब तक सिकंदराबाद, हैदराबाद, शामली और दरभंगा में जांच कर चुकी हैं। इस जांच में चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। जहां गिरफ्तारी के बाद रिमांड पर लेकर कई बार पूछताछ की गई है। जिसके बाद यह बात सामने आई है कि पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा की संरक्षण में बैठे शामली के रहने वाले इकबाल काना मुख्य साजिशकर्ता हैं। इकबाल काना सोना, नकली नोट और हथियार तस्करी करता था, और ये साल 1995 से पाकिस्तान में है। शातिर हाजी सलीम पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव इकबाल काना का नजदीकी सहयोगी हैं। आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए इकबाल काना को भेजें गये फंड को वितरित करता था। यह बात सामने आने के बाद जांच एजेंसी को केवल इसमें चार लोगों की संलिप्तता पर विश्वास नहीं हो रहा है, इसलिए अन्य की खोज जारी है।


असली सुफियान अब भी गायब



दरभंगा जंक्शन पर पार्सल ब्लास्ट 17 जून को हुआ था। जब सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस से कपड़े की गांठ वाले पार्सल को ट्रेन से उतारने के बाद कुली ने जब नीचे पटका, तभी विस्फोट हो गया। यह पार्सल सिकंदराबाद से मोहम्मद सुफियान नाम के व्यक्ति ने दरभंगा में सुफियान के लिए बुक किया था। परन्तु इस मामले के इतने दिन बीत जाने के बाद भी असली सुफियान का सुराग नहीं मिल सका हैं।

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