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दरभंगा के प्रख्यात डॉ एवं पद्मश्री से सम्मानित मोहन मिश्रा के निधन से मिथिलांचल को अभूतपूर्व क्षति।


दरभंगा के प्रख्यात डॉ एवं भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित मोहन मिश्रा के निधन से मिथिलांचल में शोक की लहर दौड़ गई है। बताते चलें कि डॉ मोहन मिश्रा को लोग मसीहा मानते थे। डॉ मोहन मिश्रा का निधन गुरुवार की देर रात को उनके आवास जो बंगाली टोला में स्थित है, हो गया। उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हो गई। बता दें कि अंतिम संस्कार के लिए डॉ मोहन मिश्रा के शव को उनके पैतृक गांव मधुबनी जिले के कोइलख ले जाया गया।


अंतिम समय तक मरीजों की सेवा में लगे रहे


डॉक्टर मोहन मिश्रा को कालाजार बीमारी पर शोध करने के लिए पद्मश्री पुरस्कार से साल 2014 में सम्मानित किया गया था। डॉ मोहन मिश्रा डीएमसीएच में मेडिसिन डिपार्टमेंट के एचओडी भी रह चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद भी वो अपने घर पर मरीजों का इलाज किया करते थे। जहां उनके यहां कुछ दिनों पहले तक मरीजों की लंबी कतार लगी रहती थी। बता दें कि कुछ दिनों पहले बीमार होने के बाद उन्होंने मरीजों को देखना छोड़ दिया था।


डिमेंशिया बीमारी की इलाज के लिए दवा ढूंढ़ा


डॉ मोहन मिश्रा के नाम एक और उपलब्धि हासिल हैं। बताते चलें कि लाइलाज बीमारी डिमेंशिया की दवा खोज करने की इच्छाशक्ति उनके अंदर इतनी जागी कि, उन्होंने अवकाश के बाद भी बैठना गंवारा नहीं किया। डिमेंशिया बीमारी से पीड़ित रोगी जब उनके पास आया करते थे, जहां उपयुक्त दवा नहीं होने के कारण उनका इलाज संभव नही हो पाता था। जिसके बाद डॉ मोहन मिश्रा ने ब्राह्मी के पौधों से इसका इलाज ढूंढा। इसको लेकर उन्होंने एक टीम बनाकर 12 मरीजों पर इसका परीक्षण वर्ष 2015 से 2016 तक किया गया। बताते चलें कि यह शोध वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं के प्रोफेशनल नेटवर्क "रिसर्च गेट" पर भी उपलब्ध है। इसको लंदन के फ्यूचर हेल्थकेयर जर्नल ने भी प्रकाशित किया है। डॉ मोहन मिश्रा के निधन की खबर से पूरा मिथिलांचल शोकाकुल है।

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